एक सवाल पहले। आप 54 साल की हैं। किसी से चार बार मिल चुकी हैं। पाँचवीं मुलाक़ात तय है। अब आपको लग रहा है कि यह रिश्ता आगे नहीं जाएगा। क्या आप:
(क) पाँचवीं मुलाक़ात कर लेती हैं और जाते-जाते बोल देती हैं "बस अब नहीं।"
(ख) मुलाक़ात के दिन सुबह फ़ोन बंद कर देती हैं।
(ग) सीधे उन्हें लिखती हैं "इस रिश्ते में मुझे जो चाहिए वह नहीं दिख रहा। धन्यवाद आपके समय का।"
जवाब है (ग)। मगर अधिकतर लोग (क) या (ख) करते हैं। यह लेख (ग) के बारे में है।
"घोस्टिंग" 25 साल के लिए भी ग़लत है, 55 के लिए असहनीय
"घोस्टिंग" का मतलब — बिना बताए ग़ायब हो जाना। फ़ोन न उठाना, मैसेज का जवाब न देना, नज़र नहीं आना। यह युवा डेटिंग की बुरी आदत है।
50+ में यह और बुरी है। क्यों? क्योंकि:
- हम सब कुछ न कुछ खो चुके हैं। ग़ायब हो जाना पुराने दुःख को फिर खोल देता है।
- हमारी बड़ी उम्र अधिक सम्मान की हक़दार है, देने में और लेने में।
- हमारे समाज छोटे हैं। अगली बार शायद वही व्यक्ति किसी अन्य कार्यक्रम में मिले।
रद्द करने के तीन स्तर
रद्द करना हमेशा एक जैसा नहीं। स्तर के अनुसार अलग।
स्तर 1 — पहली मुलाक़ात से पहले। यदि आप एक बार भी नहीं मिले और प्रोफ़ाइल या कुछ मैसेज के बाद बात आगे नहीं बढ़ाना — तो एक छोटा संदेश काफ़ी। "आपसे बात अच्छी रही, मगर मुझे लगता है हम मेल नहीं खाते। शुभकामनाएँ।" यह पाँच मिनट का काम।
कोई भाषण नहीं, कोई कारण गिनाने की ज़रूरत नहीं। संक्षिप्तता सम्मान है।
स्तर 2 — एक-दो मुलाक़ात के बाद। अब थोड़ा और विस्तार चाहिए। फ़ोन कॉल बेहतर है मैसेज से। मगर अगर मैसेज ज़रूरी हो तो:
"नमस्ते। कल हमारी मुलाक़ात के बारे में सोचा। आपके साथ बातचीत अच्छी रही, मगर मुझे लगता है कि जो आप ढूँढ रहे हैं और जो मुझे चाहिए, वह शायद अलग है। मैं आपका समय बरबाद नहीं करना चाहती। शुक्रिया, और आपको एक सच्चा साथी ज़रूर मिले।"
स्तर 3 — चार से छह मुलाक़ात के बाद। अब मैसेज अकेले काम नहीं चलाएगा। कॉल या आमने-सामने बातचीत।
"मैं आपसे मिलना चाहती हूँ आख़िरी बार, बस बात करने के लिए।" एक कैफ़े, आधा घंटा। सीधे कहिए: "मैंने सोचा है, और मुझे लगता है कि यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ सकता। आप अच्छे इंसान हैं, मुझमें कुछ ग़लत नहीं, मगर मुझे सच नहीं लग रहा। मुझे आशा है कि हम एक-दूसरे को आदर से विदा कर पाएँगे।"
जो नहीं कहना
कुछ वाक्य कभी नहीं।
- "यह मेरी ग़लती है, आप ठीक हैं।" यह झूठ है और अस्पष्ट भी। "मुझे सच नहीं लग रहा" स्पष्टता है।
- "हम दोस्त रह सकते हैं।" 50+ में यह व्यर्थ है। दोनों पक्ष समझते हैं यह शिष्टाचार है, वादा नहीं।
- "तुम्हारे बच्चे मेरी दोस्ती के लायक़ नहीं।" या कोई भी आरोप। कारण अपने पक्ष में रखिए।
- "मैं अभी तैयार नहीं, मगर बाद में हो सकता है।" अगर तैयार नहीं हैं तो न कहिए। यह जवाब झूठी आशा देता है।
- "मुझे किसी और से हो गया है।" अगर यह सच नहीं, न कहिए। और सच भी हो तो अप्रासंगिक है।
जब सामने वाला नाराज़ हो
कभी-कभी रद्द करने पर सामने वाला नाराज़ होता है। "तुमने मेरा वक़्त बरबाद किया।" "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई।" "तुम समझती क्या हो अपने आप को।"
यह उनकी प्रतिक्रिया है, आपकी ज़िम्मेदारी नहीं। आपने सम्मान से बात की, यह काफ़ी है। नाराज़गी को अपनाइए मत, बस शांति से कहिए: "मुझे खेद है कि आप दुखी हुए। मेरी शुभकामनाएँ।" और चुप हो जाइए।
अगर उनकी प्रतिक्रिया आक्रामक हो तो नंबर ब्लॉक करने में कोई शर्म नहीं। 50+ में भी सीमा ज़रूरी है।
जब आप स्वयं रद्द हो रहे हों
उलटी स्थिति। कोई आपको रद्द करे तो कैसे प्रतिक्रिया दें?
- पहला — चोट लगेगी। यह सामान्य है, कोई उम्र इसे हल्का नहीं करती।
- दूसरा — उनका फ़ैसला उनका है। आपसे कुछ "ग़लत" नहीं, बस मेल नहीं।
- तीसरा — एक पंक्ति का सम्मानजनक जवाब। "शुक्रिया बताने के लिए। आपको भी शुभकामनाएँ।" बस।
- चौथा — कारण न पूछें। यदि उन्होंने न बताया तो बताना नहीं चाहते। और कारण पता कर लेने से दर्द कम नहीं होता, बढ़ता है।
- पाँचवाँ — तीन दिन अपने आप से कोमलता। अच्छा खाना, अच्छी नींद, किसी सहेली को फ़ोन। फिर आगे।
मुंबई पाठिका की बात
मुंबई बांद्रा की एक 53 साल की पाठिका ने मुझे लिखा: "मैंने एक रिश्ता तीन मुलाक़ातों के बाद ख़त्म किया। मैसेज से नहीं, फ़ोन से। बात पाँच मिनट की थी। वे नाराज़ नहीं हुए। बाद में उन्होंने धन्यवाद लिखा — 'आपने मुझे इज़्ज़त दी। बहुत लोग ग़ायब हो जाते हैं।'"
यह मायने रखता है। हम अपने आस-पास की डेटिंग संस्कृति बनाते हैं। अगर हम सम्मान से विदा लें, तो दूसरे भी सीखते हैं।
अंतिम विचार
50+ डेटिंग का एक अलिखित नियम — यह कौशल नहीं, चरित्र है। रद्द करना अच्छी तरह करना उम्र का प्रमाण है, रिश्ते के बारे में कुछ नहीं कहता।
एक छोटी कोशिश — अगली बार जब आप किसी से रद्द करना हो, मैसेज भेजने से पहले पाँच मिनट रुकिए। सोचिए: "अगर यह मैसेज मुझे मिले, तो क्या मैं सम्मानित महसूस करूँगा?" अगर हाँ, भेजिए। अगर नहीं, बदलिए।